पदच्छेदः
| सनागयक्षगन्धर्वा | स (अव्ययः)–नाग–यक्ष–गन्धर्व (१.३) |
| देवासुरमहर्षयः | देव–असुर–महत्–ऋषि (१.३) |
| युष्माभिः | त्वद् (३.३) |
| सहितैः | सहित (३.३) |
| सर्वैर् | सर्व (३.३) |
| मया | मद् (३.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| विनिर्जिताः | विनिर्जित (√विनिः-जि + क्त, १.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | ना | ग | य | क्ष | ग | न्ध | र्वा |
| दे | वा | सु | र | म | ह | र्ष | यः |
| यु | ष्मा | भिः | स | हि | तैः | स | र्वै |
| र्म | या | स | ह | वि | नि | र्जि | ताः |