स जातमन्युः प्रसमीक्ष्य विक्रमं; स्थिरः स्थितः संयति दुर्निवारणम् ।
समाहितात्मा हनुमन्तमाहवे; प्रचोदयामास शरैस्त्रिभिः शितैः ॥
स जातमन्युः प्रसमीक्ष्य विक्रमं; स्थिरः स्थितः संयति दुर्निवारणम् ।
समाहितात्मा हनुमन्तमाहवे; प्रचोदयामास शरैस्त्रिभिः शितैः ॥
अन्वयः
संयति in war, दुर्निवारणम् irresistible, स्थिरम् steady, विक्रमम् valour, प्रसमीक्ष्य recognising, सः that Aksha, जातमन्युः became angry, स्थिरः stable, समाहितात्मा with full attention, हनुमन्तम् Hanuman, शितैः with sharp, त्रिभिः with three शरैः arrows, आहवे in the battle, प्रचोदयामास provokedM N Dutt
And growing enraged, (Aksa), staying calmly in the field, with concentrated soul, challenged Hanumān difficult to resist in conflict and of prowess worthy to witness, with three whetted shafts.Summary
Knowing that it is difficult to win Hanuman who was steady and of irresistible valour Aksha was angry. Remaining steady, with full attention, he provoked the vanara to fight and released three sharp arrows.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| जातमन्युः | जात (√जन् + क्त)–मन्यु (१.१) |
| प्रसमीक्ष्य | प्रसमीक्ष्य (√प्रसम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| विक्रमं | विक्रम (२.१) |
| स्थिरः | स्थिर (१.१) |
| स्थितः | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| संयति | संयत् (७.१) |
| दुर्निवारणम् | दुर्निवारण (२.१) |
| समाहितात्मा | समाहित–आत्मन् (१.१) |
| हनुमन्तम् | हनुमन्त् (२.१) |
| आहवे | आहव (७.१) |
| प्रचोदयामास | प्रचोदयामास (√प्र-चोदय् प्र.पु. एक.) |
| शरैस्त्रिभिः | शर (३.३)–त्रि (३.३) |
| शितैः | शित (√शा + क्त, ३.३) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | जा | त | म | न्युः | प्र | स | मी | क्ष्य | वि | क्र | मं |
| स्थि | रः | स्थि | तः | सं | य | ति | दु | र्नि | वा | र | णम् |
| स | मा | हि | ता | त्मा | ह | नु | म | न्त | मा | ह | वे |
| प्र | चो | द | या | मा | स | श | रै | स्त्रि | भिः | शि | तैः |
| ज | त | ज | र | ||||||||