ततः स बाणासनशक्रकार्मुकः; शरप्रवर्षो युधि राक्षसाम्बुदः ।
शरान्मुमोचाशु हरीश्वराचले; बलाहको वृष्टिमिवाचलोत्तमे ॥
ततः स बाणासनशक्रकार्मुकः; शरप्रवर्षो युधि राक्षसाम्बुदः ।
शरान्मुमोचाशु हरीश्वराचले; बलाहको वृष्टिमिवाचलोत्तमे ॥
अन्वयः
ततः then, बाणासनचित्रकार्मुकः endowed with a quiver and a wonderful bow, शरप्रवर्षः rain of arrows, सः राक्षसाम्बुदः that cloud of a demon, युधि in battle, आशु quickly, हरीश्वराचले on the mountain of Hanuman, वलाहकः cloud, अचलोत्तमे on a great mountain, वृष्टिमिव like showers of rain, शरान् arrows, मुमोच releasedM N Dutt
As a mass of clouds shower rain on a high hill, the arrow-showering Rākşasa resembling clouds, having the bow for his rain-bow, discharged shafts at that foremost of monkeys, representing a mountain.Summary
Aksha, with his wonderful quiver and bow, began to rain rapidly a shower of arrows in the battle, on the mountainlike monkeylord just as a cloud rains on a mountain.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| बाणासनशक्रकार्मुकः | बाणासन–शक्रकार्मुक (१.१) |
| शरप्रवर्षो | शर–प्रवर्ष (१.१) |
| युधि | युध् (७.१) |
| राक्षसाम्बुदः | राक्षस–अम्बुद (१.१) |
| शरान्मुमोचाशु | शर (२.३)–मुमोच (√मुच् लिट् प्र.पु. एक.)–आशु (२.१) |
| हरीश्वराचले | हरि–ईश्वर–अचल (७.१) |
| बलाहको | बलाहक (१.१) |
| वृष्टिम् | वृष्टि (२.१) |
| इवाचलोत्तमे | इव (अव्ययः)–अचल–उत्तम (७.१) |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | बा | णा | स | न | श | क्र | का | र्मु | कः |
| श | र | प्र | व | र्षो | यु | धि | रा | क्ष | सा | म्बु | दः |
| श | रा | न्मु | मो | चा | शु | ह | री | श्व | रा | च | ले |
| ब | ला | ह | को | वृ | ष्टि | मि | वा | च | लो | त्त | मे |
| ज | त | ज | र | ||||||||