ततस्तु रक्षोऽधिपतिर्महात्मा; हनूमताक्षे निहते कुमारे ।
मनः समाधाय तदेन्द्रकल्पं; समादिदेशेन्द्रजितं स रोषात् ॥
ततस्तु रक्षोऽधिपतिर्महात्मा; हनूमताक्षे निहते कुमारे ।
मनः समाधाय तदेन्द्रकल्पं; समादिदेशेन्द्रजितं स रोषात् ॥
अन्वयः
ततः then, महात्मा great, सः he,रक्षोधिपतिः demon king, हनूमता by Hanuman, कुमारे son, अक्षे Aksha, निहते was killed, सरोषः angry, मनः in mind, समाधाय controlled, देवकल्पम् was like a god, इन्द्रजितम् to Indrajit, समादिदेश ordered.M N Dutt
On prince Akşa having been slain by Hanumān, the magnanimous monarch of the Rākṣasas, wrought up by wrath, repressing his feelings, ordered Indrajit resembling a celestial, (to take the against the foe.)Summary
Thereafter the great demon king, mighty angry at the death of Aksha in the hands of Hanuman, controlled his feeling and ordered Indrajit who was like a godhead.पदच्छेदः
| ततस्तु | ततस् (अव्ययः)–तु (अव्ययः) |
| रक्षोऽधिपतिर् | रक्षस्–अधिपति (१.१) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
| हनूमताक्षे | हनुमन्त् (३.१)–अक्ष (७.१) |
| निहते | निहत (√नि-हन् + क्त, ७.१) |
| कुमारे | कुमार (७.१) |
| मनः | मनस् (२.१) |
| समाधाय | समाधाय (√समा-धा + ल्यप्) |
| तदेन्द्रकल्पं | तदा (अव्ययः)–इन्द्र–कल्प (२.१) |
| समादिदेशेन्द्रजितं | समादिदेश (√समा-दिश् लिट् प्र.पु. एक.)–इन्द्रजित् (२.१) |
| स | तद् (१.१) |
| रोषात् | रोष (५.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्तु | र | क्षो | ऽधि | प | ति | र्म | हा | त्मा |
| ह | नू | म | ता | क्षे | नि | ह | ते | कु | मा | रे |
| म | नः | स | मा | धा | य | त | दे | न्द्र | क | ल्पं |
| स | मा | दि | दे | शे | न्द्र | जि | तं | स | रो | षात् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||