समागतास्तत्र तु नागयक्षा; महर्षयश्चक्रचराश्च सिद्धाः ।
नभः समावृत्य च पक्षिसंघा; विनेदुरुच्चैः परमप्रहृष्टाः ॥
समागतास्तत्र तु नागयक्षा; महर्षयश्चक्रचराश्च सिद्धाः ।
नभः समावृत्य च पक्षिसंघा; विनेदुरुच्चैः परमप्रहृष्टाः ॥
अन्वयः
तत्र there, समागताः having assembled, नागयक्षाः Nagas and Yakshas, चक्रचराः those who go round the orbits, महर्षयः seers, सिद्धाश्च Siddhas, पक्षिसङ्घाः flocks of birds, नभः in the sky, समावृत्य collected, परमप्रहृष्टाः very happy, उच्चैः loudly, विनेदुः screechedM N Dutt
There arrived the Nāgas, the Yakşas, the Maharsis, the planets, and the Siddhās, and the birds, covering the the welkin, and, greatly delighted, began to make a noise.Summary
(To see the combat) the Nagas, Yakshas, seers and Siddhas who move round the heavenly orbits assembled in the sky. The birds collected in flocks in the sky and screeched loudly and happily.पदच्छेदः
| समागतास्तत्र | समागत (√समा-गम् + क्त, १.३)–तत्र (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| नागयक्षा | नाग–यक्ष (१.३) |
| महर्षयश्चक्रचराश्च | महत्–ऋषि (१.३)–चक्रचर (१.३)–च (अव्ययः) |
| सिद्धाः | सिद्ध (१.३) |
| नभः | नभस् (२.१) |
| समावृत्य | समावृत्य (√समा-वृ + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| पक्षिसंघा | पक्षिन्–संघ (१.३) |
| विनेदुर् | विनेदुः (√वि-नद् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| उच्चैः | उच्चैस् (अव्ययः) |
| परमप्रहृष्टाः | परम–प्रहृष्ट (√प्र-हृष् + क्त, १.३) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | मा | ग | ता | स्त | त्र | तु | ना | ग | य | क्षा |
| म | ह | र्ष | य | श्च | क्र | च | रा | श्च | सि | द्धाः |
| न | भः | स | मा | वृ | त्य | च | प | क्षि | सं | घा |
| वि | ने | दु | रु | च्चैः | प | र | म | प्र | हृ | ष्टाः |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||