ततः समेतावतितीक्ष्णवेगौ; महाबलौ तौ रणनिर्विशङ्कौ ।
कपिश्च रक्षोऽधिपतेश्च पुत्रः; सुरासुरेन्द्राविव बद्धवैरौ ॥
ततः समेतावतितीक्ष्णवेगौ; महाबलौ तौ रणनिर्विशङ्कौ ।
कपिश्च रक्षोऽधिपतेश्च पुत्रः; सुरासुरेन्द्राविव बद्धवैरौ ॥
अन्वयः
ततः then, अतितीक्ष्णवेगौ very fast in speed, महाबलौ mighty, रणनिर्विशङ्कौ fearless in war, तौ those two, कपिश्च vanara and, रक्षोधिपतेः of the demon king, तनूजः son, बद्धवैरौ inimical to each other, सुरासुरेन्द्राविव like sura and asura, समेतौ metM N Dutt
Thereupon closed in conflict those two greatly powerful (heroes)gifted with swift movements and fearless in battle—the monkey, and the son of the lord of Rākṣasas, like to the lords of celestials and Asuras.Summary
Then the son of the demon king and Hanuman, both very fast in speed, mighty and powerful, fearless in war and like sura and asura closed in upon each other.पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| समेतावतितीक्ष्णवेगौ | समेत (√समा-इ + क्त, १.२)–अतितीक्ष्ण–वेग (१.२) |
| महाबलौ | महत्–बल (१.२) |
| तौ | तद् (१.२) |
| रणनिर्विशङ्कौ | रण–निर्विशङ्क (१.२) |
| कपिश्च | कपि (१.१)–च (अव्ययः) |
| रक्षोऽधिपतेश्च | रक्षस्–अधिपति (६.१)–च (अव्ययः) |
| पुत्रः | पुत्र (१.१) |
| सुरासुरेन्द्राविव | सुर–असुर–इन्द्र (१.२)–इव (अव्ययः) |
| बद्धवैरौ | बद्ध (√बन्ध् + क्त)–वैर (१.२) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | स | मे | ता | व | ति | ती | क्ष्ण | वे | गौ |
| म | हा | ब | लौ | तौ | र | ण | नि | र्वि | श | ङ्कौ |
| क | पि | श्च | र | क्षो | ऽधि | प | ते | श्च | पु | त्रः |
| सु | रा | सु | रे | न्द्रा | वि | व | ब | द्ध | वै | रौ |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||