स निश्चितार्थः परवीरहन्ता; समीक्ष्य करी विनिवृत्तचेष्टः ।
परैः प्रसह्याभिगतैर्निगृह्य; ननाद तैस्तैः परिभर्त्स्यमानः ॥
स निश्चितार्थः परवीरहन्ता; समीक्ष्य करी विनिवृत्तचेष्टः ।
परैः प्रसह्याभिगतैर्निगृह्य; ननाद तैस्तैः परिभर्त्स्यमानः ॥
अन्वयः
परवीरहन्ता killer of enemy warriors, समीक्ष्यकारी one who assesses before he acts, सः he, निश्चितारः resolved, विनिवृत्तचेष्टः his power of movement arrested, अभिगतैः went, तैस्त्रै: slowly and slowly, परैः by enemies, प्रसह्य forcibly, निगृह्य siezed, परिभर्त्समानः abused, ननाद roaredM N Dutt
"Therefore let the enemies carry me." Having resolved this, the considerate (monkey)-slayer of foes—remained motionless. And being ruthlessly bound by the foes and remonstrated with by them, he began to moan piteously.Summary
Hanuman, a destroyer of enemies, who assesses before he acts, resolved (to submit to the ordinance of Brahma), to be silent (the power of his movement affected). When the enemy forces came to him slowly and slowly, siezed him forcibly and abused him, he roared.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| निश्चितार्थः | निश्चित (√निः-चि + क्त)–अर्थ (१.१) |
| परवीरहन्ता | पर–वीर–हन्तृ (१.१) |
| समीक्ष्यकारी | समीक्ष्य–कारिन् (१.१) |
| विनिवृत्तचेष्टः | विनिवृत्त (√विनि-वृत् + क्त)–चेष्टा (१.१) |
| परैः | पर (३.३) |
| प्रसह्याभिगतैर् | प्रसह्य (√प्र-सह् + ल्यप्)–अभिगत (√अभि-गम् + क्त, ३.३) |
| निगृह्य | निगृह्य (√नि-ग्रह् + ल्यप्) |
| ननाद | ननाद (√नद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| तैस्तैः | तद् (३.३)–तद् (३.३) |
| परिभर्त्स्यमानः | परिभर्त्स्यमान (√परि-भर्त्स् + शानच्, १.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | नि | श्चि | ता | र्थः | प | र | वी | र | ह | न्ता |
| स | मी | क्ष्य | क | री | वि | नि | वृ | त्त | चे | ष्टः |
| प | रैः | प्र | स | ह्या | भि | ग | तै | र्नि | गृ | ह्य |
| न | ना | द | तै | स्तैः | प | रि | भ | र्त्स्य | मा | नः |