पदच्छेदः
| निष्ठितान् | निष्ठित (√नि-स्था + क्त, २.३) |
| गजशिखायाम् | गज–शिखा (७.१) |
| ऐरावतसमान् | ऐरावत–सम (२.३) |
| युधि | युध् (७.१) |
| निहन्तॄन् | निहन्तृ (२.३) |
| परसैन्यानां | पर–सैन्य (६.३) |
| गृहे | गृह (७.१) |
| तस्मिन् | तद् (७.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सः | तद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | ष्ठि | ता | न्ग | ज | शि | खा | या |
| मै | रा | व | त | स | मा | न्यु | धि |
| नि | ह | न्तॄ | न्प | र | सै | न्या | नां |
| गृ | हे | त | स्मि | न्द | द | र्श | सः |