पदच्छेदः
| क्षरतश्च | क्षरत् (√क्षर् + शतृ, २.३)–च (अव्ययः) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| मेघान् | मेघ (२.३) |
| स्रवतश्च | स्रवत् (√स्रु + शतृ, २.३)–च (अव्ययः) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| गिरीन् | गिरि (२.३) |
| मेघस्तनितनिर्घोषान् | मेघ–स्तनित–निर्घोष (२.३) |
| दुर्धर्षान् | दुर्धर्ष (२.३) |
| समरे | समर (७.१) |
| परैः | पर (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क्ष | र | त | श्च | य | था | मे | घा |
| न्स्र | व | त | श्च | य | था | गि | रीन् |
| मे | घ | स्त | नि | त | नि | र्घो | षा |
| न्दु | र्ध | र्षा | न्स | म | रे | प | रैः |