अस्मिन्विनष्टे न हि दूतमन्यं; पश्यामि यस्तौ नरराजपुत्रौ ।
युद्धाय युद्धप्रियदुर्विनीता;वुद्योजयेद्दीर्घपथावरुद्धौ ॥
अस्मिन्विनष्टे न हि दूतमन्यं; पश्यामि यस्तौ नरराजपुत्रौ ।
युद्धाय युद्धप्रियदुर्विनीता;वुद्योजयेद्दीर्घपथावरुद्धौ ॥
अन्वयः
युद्धप्रिय O lover of war, अस्मिन् if he, विनष्टे is slain, दुर्विनीतौ those two illmannered, दीर्घपथावरुद्धौ those two who are obstructed, तौ नरराजपुत्रौ those princes, यः who ever, युद्धाय for war, उद्योजयेत् can incite, अन्यम् another, दूतम् emissary, न पश्यामि हि I donot see indeed.M N Dutt
On his being killed, another see I not who, O you that love warfare, can move those haughty sons of a king to take up arms against you.Summary
"O lover of war if Hanuman is slain I do not see any one who can incite those two illmannered sons of the king who are prevented from reaching this faroff land.पदच्छेदः
| अस्मिन् | इदम् (७.१) |
| विनष्टे | विनष्ट (√वि-नश् + क्त, ७.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| दूतम् | दूत (२.१) |
| अन्यं | अन्य (२.१) |
| पश्यामि | पश्यामि (√दृश् लट् उ.पु. ) |
| यस्तौ | यद् (१.१)–तद् (२.२) |
| नरराजपुत्रौ | नर–राजन्–पुत्र (२.२) |
| युद्धाय | युद्ध (४.१) |
| युद्धप्रियदुर्विनीताव् | युद्ध–प्रिय–दुर्विनीत (२.२) |
| उद्योजयेद् | उद्योजयेत् (√उत्-योजय् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| दीर्घपथावरुद्धौ | दीर्घ–पथ–अवरुद्ध (√अव-रुध् + क्त, २.२) |
छन्दः
इन्द्रवज्रा [११: ततजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्मि | न्वि | न | ष्टे | न | हि | दू | त | म | न्यं |
| प | श्या | मि | य | स्तौ | न | र | रा | ज | पु | त्रौ |
| यु | द्धा | य | यु | द्ध | प्रि | य | दु | र्वि | नी | ता |
| वु | द्यो | ज | ये | द्दी | र्घ | प | था | व | रु | द्धौ |
| त | त | ज | ग | ग | ||||||