अन्वयः
ततः then, रामस्य Rama's, अभ्युदये in his welfare, रतः lay, सः that, कपिकुञ्जरः elephant among vanaras, तस्मिन् on that, गिरिशृङ्गे on the mountain peak, स्थितः stood, मुहूर्तम् for a short while, चिन्तयामास pondered.
Summary
Standing on the mountain, the elephant among monkeys pondered for a while on the means of finding Sita, in which lay the welfare of Rama.
पदच्छेदः
| भूयः | भूयस् (अव्ययः) |
| स | तद् (१.१) |
| चिन्तयामास | चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) |
| कपिकुञ्जरः | कपि–कुञ्जर (१.१) |
| उत्पपाताथ | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.)–अथ (अव्ययः) |
| वेगेन | वेग (३.१) |
| ननाद | ननाद (√नद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| महाकपिः | महत्–कपि (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भू | यः | स | चि | न्त | या | मा | स |
| मु | हू | र्तं | क | पि | कु | ञ्ज | रः |
| उ | त्प | पा | ता | थ | वे | गे | न |
| न | ना | द | च | म | हा | क | पिः |