अन्वयः
यद्वा or if, सर्वत्र everywhere, प्रभुः lord, अव्ययः that which never fails, अयम् this, दहनकर्मा burning firegod, मे my, लङ्गूलम् tail, न दहति has not burnt, आर्याम् noble Sita, कथम् how, प्रधक्ष्यति will he burn.
M N Dutt
When that everywhere unspent Lord, having burning for his office, has not consumed my tail, why should he burn the exalted lady?
Summary
'If not so, the firegod who never fails in burning has not burnt my tail. How will he burn noble Sita?'
पदच्छेदः
| यद् | यत् (अव्ययः) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| दहनकर्मायं | दहन–कर्मन् (१.१)–इदम् (१.१) |
| सर्वत्र | सर्वत्र (अव्ययः) |
| प्रभुर् | प्रभु (१.१) |
| अव्ययः | अव्यय (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| दहति | दहति (√दह् लट् प्र.पु. एक.) |
| लाङ्गूलं | लाङ्गूल (२.१) |
| कथम् | कथम् (अव्ययः) |
| आर्यां | आर्य (२.१) |
| प्रधक्ष्यति | प्रधक्ष्यति (√प्र-दह् लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | द्वा | द | ह | न | क | र्मा | यं |
| स | र्व | त्र | प्र | भु | र | व्य | यः |
| न | मे | द | ह | ति | ला | ङ्गू | लं |
| क | थ | मा | र्यां | प्र | ध | क्ष्य | ति |