अन्वयः
पवनात्मजः son of the Windgod, हनुमान् Hanuman, रामदर्शनशीघ्रेण anxious to see Rama soon, प्रहर्षेण with joy, अभिचोदितः prompted, तं पर्वतम् that mountain, आरुरोह ascended.
Summary
Anxious to see Rama soon, the son of the Windgod ascended the mountain happily.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| आरुरोहातिबलः | आरुरोह (√आ-रुह् लिट् प्र.पु. एक.)–अतिबल (१.१) |
| पर्वतं | पर्वत (२.१) |
| प्लवगोत्तमः | प्लवग–उत्तम (१.१) |
| रामदर्शनशीघ्रेण | राम–दर्शन–शीघ्र (३.१) |
| प्रहर्षेणाभिचोदितः | प्रहर्ष (३.१)–अभिचोदित (√अभि-चोदय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | मा | रु | रो | हा | ति | ब | लः |
| प | र्व | तं | प्ल | व | गो | त्त | मः |
| रा | म | द | र्श | न | शी | घ्रे | ण |
| प्र | ह | र्षे | णा | भि | चो | दि | तः |