स तदा पीडितस्तेन कपिना पर्वतोत्तमः ।
ररास सह तैर्भूतैः प्राविशद्वसुधातलम् ।
कम्पमानैश्च शिखरैः पतद्भिरपि च द्रुमैः ॥
स तदा पीडितस्तेन कपिना पर्वतोत्तमः ।
ररास सह तैर्भूतैः प्राविशद्वसुधातलम् ।
कम्पमानैश्च शिखरैः पतद्भिरपि च द्रुमैः ॥
अन्वयः
तदा then, तेन कपिना by that vanara, पीडितः pressed, सः पर्वतोत्तमः that great mountain, तैः those, भूतैः सह along with the creatures, वसुधातलम् to the earth, प्रविशन् while entering, कम्पमानैः with shaking, शिखरैः with peaks, पतद्भिः with dropped, द्रुमैः with trees, ररास crushed down making great sound.M N Dutt
Then that best of mountains, sore pressed by the monkey, began to emit cries, and with various creatures (on it), entered under the Earth, with its peaks tottering and its trees toppling.Summary
Pressed under the feet of Hanuman, the great mountain made loud sound sinking into the earth along with all its creatures, with its shaken mountain peaks and uprooted trees dropping down.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| पीडितस्तेन | पीडित (√पीडय् + क्त, १.१)–तद् (३.१) |
| कपिना | कपि (३.१) |
| पर्वतोत्तमः | पर्वत–उत्तम (१.१) |
| ररास | ररास (√रस् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| तैर् | तद् (३.३) |
| भूतैः | भूत (३.३) |
| प्राविशद् | प्राविशत् (√प्र-विश् लङ् प्र.पु. एक.) |
| वसुधातलम् | वसुधा–तल (२.१) |
| कम्पमानैश्च | कम्पमान (√कम्प् + शानच्, ३.३)–च (अव्ययः) |
| शिखरैः | शिखर (३.३) |
| पतद्भिर् | पतत् (√पत् + शतृ, ३.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| द्रुमैः | द्रुम (३.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | त | दा | पी | डि | त | स्ते | न | क | पि | ना | प |
| र्व | तो | त्त | मः | र | रा | स | स | ह | तै | र्भू | तैः |
| प्रा | वि | श | द्व | सु | धा | त | लम् | क | म्प | मा | नै |
| श्च | शि | ख | रैः | प | त | द्भि | र | पि | च | द्रु | मैः |