तमक्षमागतं भग्नं निशम्य स दशाननः ।
तत इन्द्रजितं नाम द्वितीयं रावणः सुतम् ।
व्यादिदेश सुसंक्रुद्धो बलिनं युद्धदुर्मदम् ॥
तमक्षमागतं भग्नं निशम्य स दशाननः ।
तत इन्द्रजितं नाम द्वितीयं रावणः सुतम् ।
व्यादिदेश सुसंक्रुद्धो बलिनं युद्धदुर्मदम् ॥
अन्वयः
दशाननः tenfaced, सः रावणः that Ravana, आगतम् gone, अक्षम् of Aksha, भग्नम् destroyed, निशम्य after hearing, सुसंकृद्धः became very angry, ततः then, बलिनम् strong, युद्धदुर्मदम् thirsting for war, इन्द्रजितं नाम named Indrajit, द्वितीयम् second, सुतम् son, व्यादिदेश gave instruction.M N Dutt
Hearing of the discomfiture of Aksa, Ravana, exercised with ire sent his second son, the highly a rope and powerful Indrajit incapable of being repressed in battle.Summary
"When Aksha was done to death, the tenfaced Ravana was enraged and gave instruction to the second son, called Indrajit who was thirsting for war.पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अक्षम् | अक्ष (२.१) |
| आगतं | आगत (√आ-गम् + क्त, २.१) |
| भग्नं | भग्न (√भञ्ज् + क्त, २.१) |
| निशम्य | निशम्य (√नि-शामय् + ल्यप्) |
| स | तद् (१.१) |
| दशाननः | दशानन (१.१) |
| तत | ततस् (अव्ययः) |
| इन्द्रजितं | इन्द्रजित् (२.१) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| द्वितीयं | द्वितीय (२.१) |
| रावणः | रावण (१.१) |
| सुतम् | सुत (२.१) |
| व्यादिदेश | व्यादिदेश (√व्या-दिश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुसंक्रुद्धो | सु (अव्ययः)–संक्रुद्ध (√सम्-क्रुध् + क्त, १.१) |
| बलिनं | बलिन् (२.१) |
| युद्धदुर्मदम् | युद्ध–दुर्मद (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | म | क्ष | मा | ग | तं | भ | ग्नं | नि | श | म्य | स |
| द | शा | न | नः | त | त | इ | न्द्र | जि | तं | ना | म |
| द्वि | ती | यं | रा | व | णः | सु | तम् | व्या | दि | दे | श |
| सु | सं | क्रु | द्धो | ब | लि | नं | यु | द्ध | दु | र्म | दम् |