अन्वयः
सः महागिरिः that great mountain, तम् him, व्यवसायम् going to smash, बुद्ध्वा perceiving, मनः my mind, प्रह्लादयन्निव delighting, पुत्त्र इति like a son, मधुराम् sweet, वाणीम् tone, उवाच ह spoke.
Summary
"Perceiving that I am going to smash him he spoke to me in a sweet tone delighting my heart, addressing me like a son.
पदच्छेदः
| व्यवसायं | व्यवसाय (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| बुद्ध्वा | बुद्ध्वा (√बुध् + क्त्वा) |
| स | तद् (१.१) |
| होवाच | ह (अव्ययः)–उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महागिरिः | महत्–गिरि (१.१) |
| पुत्रेति | पुत्र (८.१)–इति (अव्ययः) |
| मधुरां | मधुर (२.१) |
| वाणीं | वाणी (२.१) |
| मनःप्रह्लादयन्न् | मनस् (२.१)–प्रह्लादयत् (√प्र-ह्लादय् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व्य | व | सा | यं | च | मे | बु | द्ध्वा |
| स | हो | वा | च | म | हा | गि | रिः |
| पु | त्रे | ति | म | धु | रां | बा | णीं |
| म | नः | प्र | ह्ला | द | य | न्नि | व |