तत्त्वतः सर्वमेतन्नः प्रब्रूहि त्वं महाकपे ।
श्रुतार्थाश्चिन्तयिष्यामो भूयः कार्यविनिश्चयम् ॥
तत्त्वतः सर्वमेतन्नः प्रब्रूहि त्वं महाकपे ।
श्रुतार्थाश्चिन्तयिष्यामो भूयः कार्यविनिश्चयम् ॥
अन्वयः
महाकपे great vanara, एतत् all that, सर्वम् entire, तत्त्वतः truly, त्वम् you, नः us, प्रब्रूहि after knowing, श्रुतार्थाः after hearing, भूयःकार्यविनिश्चयम् next course of action, चिन्तयिष्यामः will think .M N Dutt
How could you track the exalted lady? And what did she say in reply (to your querries)?, Having learnt the real state of things, we shall decide what is to be done.Summary
"O Hanuman, tell us in detail the entire thing. On hearing it, we will think about the next course of action.पदच्छेदः
| तत्त्वतः | तत्त्व (५.१) |
| सर्वम् | सर्व (२.१) |
| एतन्नः | एतद् (२.१)–मद् (२.३) |
| प्रब्रूहि | प्रब्रूहि (√प्र-ब्रू लोट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| महाकपे | महत्–कपि (८.१) |
| श्रुतार्थाश्चिन्तयिष्यामो | श्रुत (√श्रु + क्त)–अर्थ (१.३)–चिन्तयिष्यामः (√चिन्तय् लृट् उ.पु. द्वि.) |
| भूयः | भूयस् (अव्ययः) |
| कार्यविनिश्चयम् | कार्य–विनिश्चय (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्त्व | तः | स | र्व | मे | त | न्नः |
| प्र | ब्रू | हि | त्वं | म | हा | क | पे |
| श्रु | ता | र्था | श्चि | न्त | यि | ष्या | मो |
| भू | यः | का | र्य | वि | नि | श्च | यम् |