अन्वयः
ततः then, अहम् I, निमिषान्तरात् in a moment, विपुलम् vast, रूपम् form, संक्षिप्य reduced, तस्याः from her, हृदयम् heart, आदाय entered, नभस्थलम् into the sky, प्रपतामि sprang up.
M N Dutt
Then in the twinkling of an eye contracting my vasty shape, I, extracting her heart, darted into the sky.
Summary
"In a moment I reduced from a huge form to a small one, entered her heart and sprang into the sky.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| विपुलं | विपुल (२.१) |
| रूपं | रूप (२.१) |
| संक्षिप्य | संक्षिप्य (√सम्-क्षिप् + ल्यप्) |
| निमिषान्तरात् | निमिष–अन्तर (५.१) |
| तस्या | तद् (६.१) |
| हृदयम् | हृदय (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| प्रपतामि | प्रपतामि (√प्र-पत् लट् उ.पु. ) |
| नभस्तलम् | नभस्तल (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | ऽहं | वि | पु | लं | रू | पं |
| सं | क्षि | प्य | नि | मि | षा | न्त | रात् |
| त | स्या | हृ | द | य | मा | दा | य |
| प्र | प | ता | मि | न | भ | स्त | लम् |