अन्वयः
ततः then, अहम् I, परमोद्विग्नः very scared, स्वं रूपम् my form, प्रत्यसंहरम् contracted my body, अहं तु I also, गहने sky, शिंशुपावृक्षे in the Simsupa tree, पक्षीव like a bird, स्थितः stood.
M N Dutt
Thereat exceedingly agitated, I changed my proper shape; and remained like a bird in a dark part of the Sinsapā tree.
Summary
"I was scared and contracted my body size and stood on the Simsupa tree like a bird in the sky.
पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽहं | मद् (१.१) |
| परमोद्विग्नः | परम–उद्विग्न (√उत्-विज् + क्त, १.१) |
| स्वरूपं | स्व–रूप (२.१) |
| प्रत्यसंहरम् | प्रत्यसंहरम् (√प्रतिसम्-हृ लङ् उ.पु. ) |
| अहं | मद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| शिंशपावृक्षे | शिंशपा–वृक्ष (७.१) |
| पक्षीव | पक्षिन् (१.१)–इव (अव्ययः) |
| गहने | गहन (७.१) |
| स्थितः | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तो | ऽहं | प | र | मो | द्वि | ग्नः |
| स्व | रू | पं | प्र | त्य | सं | ह | रम् |
| अ | हं | च | शिं | श | पा | वृ | क्षे |
| प | क्षी | व | ग | ह | ने | स्थि | तः |