अन्वयः
जानकी Janaki, तासाम् those, भाषितम् words, तृणवत् like a blade of grass, गणयामास not cared, तदा then, तासाम् they, गर्जितम् frightened, सीताम् Sita, प्राप्य uttered, निरर्थकम् were of no use.
M N Dutt
But Jänakī heeded their speech as a straw; and their fury was lost upon Sītā.
Summary
"Janaki did not care for their words of threat, as though they were a blade of grass and of no use to her.
पदच्छेदः
| तृणवद् | तृण–वत् (अव्ययः) |
| भाषितं | भाषित (२.१) |
| तासां | तद् (६.३) |
| गणयामास | गणयामास (√गणय् प्र.पु. एक.) |
| जानकी | जानकी (१.१) |
| तर्जितं | तर्जित (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| तासां | तद् (६.३) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| निरर्थकम् | निरर्थक (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तृ | ण | व | द्भा | षि | तं | ता | सां |
| ग | ण | या | मा | स | जा | न | की |
| त | र्जि | तं | च | त | दा | ता | सां |
| सी | तां | प्रा | प्य | नि | र | र्थ | कम् |