तां चाहं तादृशीं दृष्ट्वा सीताया दारुणां दशाम् ।
चिन्तयामास विश्रान्तो न च मे निर्वृतं मनः ॥
तां चाहं तादृशीं दृष्ट्वा सीताया दारुणां दशाम् ।
चिन्तयामास विश्रान्तो न च मे निर्वृतं मनः ॥
अन्वयः
हनुमान् Hanuman, सुरासुरैः by gods and demons, दुराधर्षाम् unassailable, तादृशीम् such, ताम् that, पुरीम् city, दृष्ट्वा seeing, विनिश्चित्य sighing, मुहुर्मुहुः again and again, चिन्तयामास reflected.M N Dutt
Witnessing such a hard condition of Sītā I began to reflect; nor did my mind attain ease or freedom from thought. And I cast about for finding means of addressing Jānaki.Summary
'Looking at the city, unassailable even to gods and demons, Hanuman sighed again and again thinking:पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| चाहं | च (अव्ययः)–मद् (१.१) |
| तादृशीं | तादृश (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| सीताया | सीता (६.१) |
| दारुणां | दारुण (२.१) |
| दशाम् | दशा (२.१) |
| चिन्तयामास | चिन्तयामास (√चिन्तय् प्र.पु. एक.) |
| विश्रान्तो | विश्रान्त (√वि-श्रम् + क्त, १.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| च | च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| निर्वृतं | निर्वृत (१.१) |
| मनः | मनस् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | चा | हं | ता | दृ | शीं | दृ | ष्ट्वा |
| सी | ता | या | दा | रु | णां | द | शाम् |
| चि | न्त | या | मा | स | वि | श्रा | न्तो |
| न | च | मे | नि | र्वृ | तं | म | नः |