न तावदेषा मतिरक्षमा नो; यथा भवान्पश्यति राजपुत्र ।
यथा तु रामस्य मतिर्निविष्टा; तथा भवान्पश्यतु कार्यसिद्धिम् ॥
न तावदेषा मतिरक्षमा नो; यथा भवान्पश्यति राजपुत्र ।
यथा तु रामस्य मतिर्निविष्टा; तथा भवान्पश्यतु कार्यसिद्धिम् ॥
अन्वयः
राजपुत्र O prince, भवान् you, यथा this way, पश्यति thought of, एषा also, मतिः to my mind, नः none, अक्षमा acceptable, न तावत् we are capable, तु you, रामस्य Rama's, मतिः mind, यथा this way, निविष्टा should act, तथा that way, भवान् you, कार्यसिद्धिम् to accomplish the work, पश्यतु do it.M N Dutt
What you had judged, O prince, is liked by us. And still you should look to Rāma's resolution and bring about his end.Summary
"O prince what you think is acceptable to us also. Even though we are capable of achieving, knowing what is in Rama's mind, we should act only according to his command to accomplish the task.इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीय आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे षष्टितमस्सर्गः॥Thus ends the sixtieth sarga of Sundarakanda of the holy Ramyana, the first epic composed by sage Valmiki.पदच्छेदः
| न | न (अव्ययः) |
| तावद् | तावत् (अव्ययः) |
| एषा | एतद् (१.१) |
| मतिर् | मति (१.१) |
| अक्षमा | अक्षम (१.१) |
| नो | मद् (६.३) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| पश्यति | पश्यति (√दृश् लट् प्र.पु. एक.) |
| राजपुत्र | राजन्–पुत्र (८.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| मतिर् | मति (१.१) |
| निविष्टा | निविष्ट (√नि-विश् + क्त, १.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| पश्यतु | पश्यतु (√पश् लोट् प्र.पु. एक.) |
| कार्यसिद्धिम् | कार्य–सिद्धि (२.१) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ता | व | दे | षा | म | ति | र | क्ष | मा | नो |
| य | था | भ | वा | न्प | श्य | ति | रा | ज | पु | त्र |
| य | था | तु | रा | म | स्य | म | ति | र्नि | वि | ष्टा |
| त | था | भ | वा | न्प | श्य | तु | का | र्य | सि | द्धिम् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||