ततो वनं तत्परिभक्ष्यमाणं; द्रुमांश्च विध्वंसितपत्रपुष्पान् ।
समीक्ष्य कोपाद्दधिवक्त्रनामा; निवारयामास कपिः कपींस्तान् ॥
ततो वनं तत्परिभक्ष्यमाणं; द्रुमांश्च विध्वंसितपत्रपुष्पान् ।
समीक्ष्य कोपाद्दधिवक्त्रनामा; निवारयामास कपिः कपींस्तान् ॥
अन्वयः
ततः that, दधिवक्त्रनामा named Dadhimukha, कपिः monkey, परिभक्ष्यमाणम् drank all the honeywine, तत् that, वनम् garden, विध्वंसितपत्रपुष्पान् leaves, flowers, द्रुमांश्च and trees, समीक्ष्य seeing, कोपात् in anger, तान् कपीन् the monkeys, निवारयामास asked them to stop and get out.M N Dutt
Thereupon beholding all the fruits eaten up and the trees divested of leaves and flowers, the monkey Dadhimukha and worked up with ire and attempted to prevent them.Summary
Beholding the destruction wrought by the vanaras to the garden, trees, leaves and flowers, and having drunk all the honey, Dadhimukha angrily asked them to stop and get out.पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वनं | वन (२.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| परिभक्ष्यमाणं | परिभक्ष्यमाण (√परि-भक्षय् + शानच्, २.१) |
| द्रुमांश्च | द्रुम (२.३)–च (अव्ययः) |
| विध्वंसितपत्रपुष्पान् | विध्वंसित (√वि-ध्वंसय् + क्त)–पत्त्र–पुष्प (२.३) |
| समीक्ष्य | समीक्ष्य (√सम्-ईक्ष् + ल्यप्) |
| कोपाद् | कोप (५.१) |
| दधिवक्त्रनामा | दधिवक्त्र–नामन् (१.१) |
| निवारयामास | निवारयामास (√नि-वारय् प्र.पु. एक.) |
| कपिः | कपि (१.१) |
| कपींस्तान् | कपि (२.३)–तद् (२.३) |
छन्दः
उपेन्द्रवज्रा [११: जतजगग]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | व | नं | त | त्प | रि | भ | क्ष्य | मा | णं |
| द्रु | मां | श्च | वि | ध्वं | सि | त | प | त्र | पु | ष्पान् |
| स | मी | क्ष्य | को | पा | द्द | धि | व | क्त्र | ना | मा |
| नि | वा | र | या | मा | स | क | पिः | क | पीं | स्तान् |
| ज | त | ज | ग | ग | ||||||