स पित्रा च परित्यक्तः सुरैः सर्वैर्महर्षिभिः ।
त्रीँल्लोकान्संपरिक्रम्य त्रातारं नाधिगच्छति ॥
स पित्रा च परित्यक्तः सुरैः सर्वैर्महर्षिभिः ।
त्रीँल्लोकान्संपरिक्रम्य त्रातारं नाधिगच्छति ॥
अन्वयः
सः he, त्रीन् three, लोकान् worlds, सम्परिक्रम्य having gone round, पित्रा च and to his father also, समहर्षिभिः including the sages, सुरैश्च by gods, परित्यक्तः rejected, तमेव him alone, शरणं गतः went seeking refuge.M N Dutt
And being forsaken even by the celestials, who were terrified, and ransacking the three worlds it did not get a refuge.Summary
'Then the crow went round all the three worlds, having been rejected by his father Indra, including all the sages and gods. Refused by all he came back to Rama seeking shelter.पदच्छेदः
| त्रींल् | त्रि (२.३) |
| लोकान् | लोक (२.३) |
| सम्परिक्रम्य | सम्परिक्रम्य (√सम्परि-क्रम् + ल्यप्) |
| त्रातारं | त्रातृ (२.१) |
| नाधिगच्छति | न (अव्ययः)–अधिगच्छति (√अधि-गम् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | पि | त्रा | च | प | रि | त्य | क्तः |
| सु | रैः | स | र्वै | र्म | ह | र्षि | भिः |
| त्री | ल्लो | का | न्सं | प | रि | क्र | म्य |
| त्रा | ता | रं | ना | धि | ग | च्छ | ति |