अन्वयः
पुनः पुनः again and again, उपागम्य coming over her, भृशम् violently, विददार किल started scratching, ततः then, त्वम् you, तस्याः her, शोणितेन by blood, समुक्षितः wet by shedding, बोधितः किल woke you up.
M N Dutt
And it again wounded her. And being bathed in blood and suffering terrible pangs, that worshipful dame aroused you.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| उपागम्य | उपागम्य (√उपा-गम् + ल्यप्) |
| विरराद | विरराद (√वि-रद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| भृशं | भृशम् (अव्ययः) |
| किल | किल (अव्ययः) |
| ततस्त्वं | ततस् (अव्ययः)–त्वद् (१.१) |
| बोधितस्तस्याः | बोधित (√बोधय् + क्त, १.१)–तद् (६.१) |
| शोणितेन | शोणित (३.१) |
| समुक्षितः | समुक्षित (√सम्-उक्ष् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | पु | न | रु | पा | ग | म्य |
| वि | र | रा | द | भृ | शं | कि | ल |
| त | त | स्त्वं | बो | धि | त | स्त | स्याः |
| शो | णि | ते | न | स | मु | क्षि | तः |