अन्वयः
ततः then, प्रस्थितः he started, कान्ताम् beloved, वरस्त्रियमिव like his chief queen, रावणस्य Ravana's, मनः कान्ताम् dear his to heart, शुभाम् auspicious, महतीम् great, शालाम् hall, ददर्श saw.
Summary
Then he proceeded to an auspicious hall, which was Ravana's favourite like his chief queen dear to his heart.
पदच्छेदः
| ततस्तां | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| प्रस्थितः | प्रस्थित (√प्र-स्था + क्त, १.१) |
| शालां | शाला (२.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| महतीं | महत् (२.१) |
| शुभाम् | शुभ (२.१) |
| रावणस्य | रावण (६.१) |
| मनःकान्तां | मनस्–कान्त (२.१) |
| कान्ताम् | कान्ता (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| वरस्त्रियम् | वर–स्त्री (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त | स्तां | प्र | स्थि | तः | शा | लां |
| द | द | र्श | म | ह | तीं | शु | भाम् |
| रा | व | ण | स्य | म | नः | का | न्तां |
| का | न्ता | मि | व | व | र | स्त्रि | यम् |