अन्वयः
रावणपालिता chamber of Ravana, तदा then, माता इव like a mother, उत्तमैः with excellent, पञ्चभिः with the five, इन्द्रियार्थैः with objects of the senses, पञ्च five, इन्द्रियाणि sense organs, तर्पयामास satisfied.
Summary
The chamber of Ravana, like a mother, gratified all the five senses of Hanuman with proper objects of the senses.
पदच्छेदः
| इन्द्रियाणीन्द्रियार्थैस्तु | इन्द्रिय (२.३)–इन्द्रिय–अर्थ (३.३)–तु (अव्ययः) |
| पञ्च | पञ्चन् (२.३) |
| पञ्चभिर् | पञ्चन् (३.३) |
| उत्तमैः | उत्तम (३.३) |
| तर्पयामास | तर्पयामास (√तर्पय् प्र.पु. एक.) |
| मातेव | मातृ (१.१)–इव (अव्ययः) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| रावणपालिता | रावण–पालित (√पालय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | न्द्रि | या | णी | न्द्रि | या | र्थै | स्तु |
| प | ञ्च | प | ञ्च | भि | रु | त्त | मैः |
| त | र्प | या | मा | स | मा | ते | व |
| त | दा | रा | व | ण | पा | लि | ता |