अन्वयः
पवनात्मजः son of the Windgod, तस्य of that, हर्म्यस्य of the palace, मध्यस्थम् in the centre, सुनिर्मितम् well built, बहुनिर्यूहसङ्कीर्णम् a complex many houses, अन्यत् another, वेश्म home, ददर्श saw.
Summary
Hanuman saw in the centre of that palace a complex of many wellbuilt houses.
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| हर्म्यस्य | हर्म्य (६.१) |
| मध्यस्थं | मध्य–स्थ (२.१) |
| वेश्म | वेश्मन् (२.१) |
| चान्यत् | च (अव्ययः)–अन्य (२.१) |
| सुनिर्मितम् | सु (अव्ययः)–निर्मित (√निः-मा + क्त, २.१) |
| बहुनिर्यूहसंकीर्णं | बहु–निर्यूह–संकीर्ण (√सम्-कृ + क्त, २.१) |
| ददर्श | ददर्श (√दृश् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पवनात्मजः | पवनात्मज (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | ह | र्म्य | स्य | म | ध्य | स्थं |
| वे | श्म | चा | न्य | त्सु | नि | र्मि | तम् |
| ब | हु | नि | र्यू | ह | सं | की | र्णं |
| द | द | र्श | प | व | ना | त्म | जः |