पदच्छेदः
| वृतम् | वृत (√वृ + क्त, २.१) |
| आभरणैर् | आभरण (३.३) |
| दिव्यैः | दिव्य (३.३) |
| सुरूपं | सुरूप (२.१) |
| कामरूपिणम् | कामरूपिन् (२.१) |
| सवृक्षवनगुल्माढ्यं | स (अव्ययः)–वृक्ष–वन–गुल्म–आढ्य (२.१) |
| प्रसुप्तम् | प्रसुप्त (√प्र-स्वप् + क्त, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| मन्दरम् | मन्दर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वृ | त | मा | भ | र | णै | र्दि | व्यैः |
| सु | रू | पं | का | म | रू | पि | णम् |
| स | वृ | क्ष | व | न | गु | ल्मा | ढ्यं |
| प्र | सु | प्त | मि | व | म | न्द | रम् |