अन्वयः
मारुतात्मज Maruti's son, इह here, राक्षसेन by Rakshasa, आज्ञप्ताः order, राक्षस्यः rakshsas, माम् me, तर्जयन्ति threatened, तस्मिन् with his, हते death, तर्जनम् threaten, न कुर्वन्ति not to be done
M N Dutt
And he being slain they shall not repress me any longer, O son of the Wind-god.
Summary
"By Ravana's order they threatened me so. Now with his death, they will not be threatening me."
पदच्छेदः
| आज्ञप्ता | आज्ञप्त (√आ-ज्ञपय् + क्त, १.३) |
| रावणेनैता | रावण (३.१)–एतद् (१.३) |
| राक्षस्यो | राक्षसी (१.३) |
| माम् | मद् (२.१) |
| अतर्जयन् | अतर्जयन् (√तर्जय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| हते | हत (√हन् + क्त, ७.१) |
| तस्मिन्न | तद् (७.१)–न (अव्ययः) |
| कुर्युर् | कुर्युः (√कृ विधिलिङ् प्र.पु. बहु.) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| तर्जनं | तर्जन (२.१) |
| वानरोत्तम | वानर–उत्तम (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| आ | ज्ञ | प्ता | रा | व | णे | नै | ता |
| रा | क्ष | स्यो | मा | म | त | र्ज | यन् |
| ह | ते | त | स्मि | न्न | कु | र्यु | र्हि |
| त | र्ज | नं | वा | न | रो | त्त | म |