अन्वयः
अथ now, राघवः Raghava, उत्सार्यमाणान् dispersing, जगत्याम् moving, जातसम्भ्रमान् excited to know, दृष्टवा seeing, दाक्षिण्यात् out of kindness, अमर्षात् resented, तत् that, वारयामास stopped
M N Dutt
Beholding the monkeys driven on all sides and troubled Rāghava out of anger and compassion prevented him.
Summary
Seeing them excited to know and dispersing, Raghava stopped them out of kindness.
पदच्छेदः
| उत्सार्यमाणांस्तान् | उत्सार्यमाण (√उत्-सारय् + शानच्, २.३)–तद् (२.३) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| समन्ताज्जातसंभ्रमान् | समन्तात् (अव्ययः)–जात (√जन् + क्त)–सम्भ्रम (२.३) |
| दाक्षिण्यात् | दाक्षिण्य (५.१) |
| तदमर्षाच्च | तद्–अमर्ष (५.१)–च (अव्ययः) |
| वारयामास | वारयामास (√वारय् प्र.पु. एक.) |
| राघवः | राघव (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | त्सा | र्य | मा | णां | स्ता | न्दृ | ष्ट्वा |
| स | म | न्ता | ज्जा | त | सं | भ्र | मान् |
| दा | क्षि | ण्या | त्त | द | म | र्षा | च्च |
| वा | र | या | मा | स | रा | घ | वः |