तां तु पार्श्वे स्थितां प्रह्वां रामः संप्रेक्ष्य मैथिलीम् ।
हृदयान्तर्गतक्रोधो व्याहर्तुमुपचक्रमे ॥
तां तु पार्श्वे स्थितां प्रह्वां रामः संप्रेक्ष्य मैथिलीम् ।
हृदयान्तर्गतक्रोधो व्याहर्तुमुपचक्रमे ॥
अन्वयः
रामः Rama, पार्श्वे near, स्थिताम् stood, प्रह्वाम् shy, तांमैथिलीम् she, Mythili, सम्प्रेक्ष्य observing, हृदयान्तर्गतम् in his heart, क्रोधम् anger, व्याहर्तुम् expression, उपचक्रमे startedM N Dutt
Beholding Maithili standing humbly by him, Räma began to give vent to his pent-up feelings.Summary
Observing Mythili who stood near him, Rama started to give expression to what was in his heart.पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| पार्श्वे | पार्श्व (७.१) |
| स्थितां | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| प्रह्वां | प्रह्व (२.१) |
| रामः | राम (१.१) |
| सम्प्रेक्ष्य | सम्प्रेक्ष्य (√सम्प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| मैथिलीम् | मैथिली (२.१) |
| हृदयान्तर्गतक्रोधो | हृदय–अन्तर्गत (√अन्तः-गम् + क्त)–क्रोध (१.१) |
| व्याहर्तुम् | व्याहर्तुम् (√व्या-हृ + तुमुन्) |
| उपचक्रमे | उपचक्रमे (√उप-क्रम् लिट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तां | तु | पा | र्श्वे | स्थि | तां | प्र | ह्वां |
| रा | मः | सं | प्रे | क्ष्य | मै | थि | लीम् |
| हृ | द | या | न्त | र्ग | त | क्रो | धो |
| व्या | ह | र्तु | मु | प | च | क्र | मे |