तदर्थं निर्जिता मे त्वं यशः प्रत्याहृतं मया ।
नास्ति मे त्वय्यभिष्वङ्गो यथेष्टं गम्यतामितः ॥
तदर्थं निर्जिता मे त्वं यशः प्रत्याहृतं मया ।
नास्ति मे त्वय्यभिष्वङ्गो यथेष्टं गम्यतामितः ॥
अन्वयः
त्वम् your, तदर्थम् the purpose, मे my, निर्जिता to rid of, मया by me, यशः fame, प्रत्याहृतम् won back, मे by me, त्वयि in you, अभिष्वङ्गः no interest, नास्ति not,M N Dutt
The object, with which I have gained you back, has been accomplished. I have got no attachment for you-do you go wherever you wish, O gentle one.Summary
"The reason for winning you back is to get rid of the insult. Now I have no interest in you. You may go to the place of your choice."पदच्छेदः
| तदर्थं | तद्–अर्थ (२.१) |
| निर्जिता | निर्जित (√निः-जि + क्त, १.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| यशः | यशस् (१.१) |
| प्रत्याहृतं | प्रत्याहृत (√प्रत्या-हृ + क्त, १.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| नास्ति | न (अव्ययः)–अस्ति (√अस् लट् प्र.पु. एक.) |
| मे | मद् (६.१) |
| त्वय्यभिष्वङ्गो | त्वद् (७.१)–अभिष्वङ्ग (१.१) |
| यथेष्टं | यथेष्ट (२.१) |
| गम्यताम् | गम्यताम् (√गम् प्र.पु. एक.) |
| इतः | इतस् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | र्थं | नि | र्जि | ता | मे | त्वं |
| य | शः | प्र | त्या | हृ | तं | म | या |
| ना | स्ति | मे | त्व | य्य | भि | ष्व | ङ्गो |
| य | थे | ष्टं | ग | म्य | ता | मि | तः |