अन्वयः
सौमित्रे Saumithri, मे I, अस्य this, व्यसनस्य sorrow, भेषजम् cure, चिताम् pyre, कुरु arrange, मिथ्यापवादोपहता false reproaches, अहम् I, जीवितुम् to live, न उत्सहे not desire
M N Dutt
Make a funeral pyre for me, O Saumitri, that is the only remedy for this disaster. Being thus branded with an unfounded stigma I do not like to keep my life.
Summary
"Saumithri! Cure for this sorrow is only pyre. Arrange for pyre as I do not desire to live with false reproaches."
पदच्छेदः
| चितां | चिता (२.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| कुरु | कुरु (√कृ लोट् म.पु. ) |
| सौमित्रे | सौमित्रि (८.१) |
| व्यसनस्यास्य | व्यसन (६.१)–इदम् (६.१) |
| भेषजम् | भेषज (२.१) |
| मिथ्यापवादोपहता | मिथ्या (अव्ययः)–अपवाद–उपहत (√उप-हन् + क्त, १.१) |
| नाहं | न (अव्ययः)–मद् (१.१) |
| जीवितुम् | जीवितुम् (√जीव् + तुमुन्) |
| उत्सहे | उत्सहे (√उत्-सह् लट् उ.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| चि | तां | मे | कु | रु | सौ | मि | त्रे |
| व्य | स | न | स्या | स्य | भे | ष | जम् |
| मि | थ्या | प | वा | दो | प | ह | ता |
| ना | हं | जी | वि | तु | मु | त्स | हे |