अन्वयः
सत्यसंश्रयःfollower of truth, त्रयाणाम् three worlds, लोकानाम् in the world, प्रत्ययार्थम् to convince, हुताशनम् fire, प्रविशन्तीम् entering fire, वैदेहीम् Vaidehi, उपेक्षेचापिI was disregarding
Summary
" As I am a follower of truth only, to convince the three worlds I was disregarding Vaidehi entering fire."
पदच्छेदः
| प्रत्ययार्थं | प्रत्यय–अर्थ (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| लोकानां | लोक (६.३) |
| त्रयाणां | त्रि (६.३) |
| सत्यसंश्रयः | सत्य–संश्रय (१.१) |
| उपेक्षे | उपेक्षे (√उप-ईक्ष् लट् उ.पु. ) |
| चापि | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः) |
| वैदेहीं | वैदेही (२.१) |
| प्रविशन्तीं | प्रविशत् (√प्र-विश् + शतृ, २.१) |
| हुताशनम् | हुताशन (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | त्य | या | र्थं | तु | लो | का | नां |
| त्र | या | णां | स | त्य | सं | श्र | यः |
| उ | पे | क्षे | चा | पि | वै | दे | हीं |
| प्र | वि | श | न्तीं | हु | ता | श | नम् |