सिद्धार्था खलु कौसल्या या त्वां राम गृहं गतम् ।
वनान्निवृत्तं संहृष्टा द्रक्ष्यते शत्रुसूदन ॥
सिद्धार्था खलु कौसल्या या त्वां राम गृहं गतम् ।
वनान्निवृत्तं संहृष्टा द्रक्ष्यते शत्रुसूदन ॥
अन्वयः
राम Rama, वनात् in the forest, निवृत्तम् returned, शत्रुसूदनम् destroyer of enemy, गृहम् house, गतम् returned, त्वाम् you, या she, संहृष्टा highly rejoiced, द्रक्ष्यते will see you, कौसल्या Kausalya, सिद्धार्थाखलु accomplished as you areM N Dutt
Blessed is Kausalyā, O Rāma, who shall be greatly delighted, on beholding you, the slayer of enemies, gone home from the forest.Summary
"Rama! Kausalya will see you, as an accomplished one, as a destroyer of enemies, on returning home from the forest and will be highly rejoiced."पदच्छेदः
| सिद्धार्था | सिद्धार्थ (१.१) |
| खलु | खलु (अव्ययः) |
| कौसल्या | कौसल्या (१.१) |
| या | यद् (१.१) |
| त्वां | त्वद् (२.१) |
| राम | राम (८.१) |
| गृहं | गृह (२.१) |
| गतम् | गत (√गम् + क्त, २.१) |
| वनान्निवृत्तं | वन (५.१)–निवृत्त (√नि-वृत् + क्त, २.१) |
| संहृष्टा | संहृष्ट (√सम्-हृष् + क्त, १.१) |
| द्रक्ष्यते | द्रक्ष्यते (√दृश् लृट् प्र.पु. एक.) |
| शत्रुसूदन | शत्रु–सूदन (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| सि | द्धा | र्था | ख | लु | कौ | स | ल्या |
| या | त्वां | रा | म | गृ | हं | ग | तम् |
| व | ना | न्नि | वृ | त्तं | सं | हृ | ष्टा |
| द्र | क्ष्य | ते | श | त्रु | सू | द | न |