अन्वयः
सीता: Sita, साधु: correct, रामाय: to Rama, निर्यात्यताम् इति: to restore, पुनःपुनः again and again, तम् him, अहम् I, हेतुभिः argued also, विविधैः in several ways, वाक्यैः words, न्यदर्शयम् to explain.
M N Dutt
With various well meaning words and reasonings I pointed out to him, the necessity of rendering back Sītā to Rāma.
Summary
"I argued with him again and again in several ways to explain him and admonished him saying 'restore Sita to Rama'."
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अहं | मद् (१.१) |
| हेतुभिर् | हेतु (३.३) |
| वाक्यैर् | वाक्य (३.३) |
| विविधैश्च | विविध (३.३)–च (अव्ययः) |
| न्यदर्शयम् | न्यदर्शयम् (√नि-दर्शय् लङ् उ.पु. ) |
| साधु | साधु (२.१) |
| निर्यात्यतां | निर्यात्यताम् (√निः-यातय् प्र.पु. एक.) |
| सीता | सीता (१.१) |
| रामायेति | राम (४.१)–इति (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | म | हं | हे | तु | भि | र्वा | क्यै |
| र्वि | वि | धै | श्च | न्य | द | र्श | यम् |
| सा | धु | नि | र्या | त्य | तां | सी | ता |
| रा | मा | ये | ति | पु | नः | पु | नः |