अन्वयः
महात्मने: O great soul, सर्वलोकशरण्याय: one who is a protector of the whole world, राघवाय: Raghava's, विभीषणं: Vibheeshana, माम् I, उपस्थितम् waiting here, क्षिप्रम् at once, निवेदयत: you may inform.
Summary
At once you may inform Raghava who is a protector of the whole world that I, Vibheeshana, are waiting here.
पदच्छेदः
| सर्वलोकशरण्याय | सर्व–लोक–शरण्य (४.१) |
| राघवाय | राघव (४.१) |
| महात्मने | महात्मन् (४.१) |
| निवेदयत | निवेदयत (√नि-वेदय् लोट् म.पु. द्वि.) |
| मां | मद् (२.१) |
| क्षिप्रं | क्षिप्रम् (अव्ययः) |
| विभीषणम् | विभीषण (२.१) |
| उपस्थितम् | उपस्थित (√उप-स्था + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | र्व | लो | क | श | र | ण्या | य |
| रा | घ | वा | य | म | हा | त्म | ने |
| नि | वे | द | य | त | मां | क्षि | प्रं |
| वि | भी | ष | ण | मु | प | स्थि | तम् |