अन्वयः
महाप्राज्ञः very wise, महान् great, विभीषणः Vibheeshana, सुग्रीवम् at Sugriva, तांश्च: and those (Vanaras ), सम्प्रेक्ष्य: gazing, सर्वान् all, महता: loud, स्वरेण: tone, उवाच: addressed.
M N Dutt
And beholdings Sugrīva and all others stationed near him, the highly intelligent Vibhīşaņa accosted them, at the highest pitch of his voice, saying.
Summary
Great and very wise Vibheeshana, gazing at Sugriva and the Vanaras, addressed them in a loud tone.
पदच्छेदः
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| च | च (अव्ययः) |
| महाप्राज्ञः | महत्–प्राज्ञ (१.१) |
| स्वरेण | स्वर (३.१) |
| महता | महत् (३.१) |
| महान् | महत् (१.१) |
| सुग्रीवं | सुग्रीव (२.१) |
| तांश्च | तद् (२.३)–च (अव्ययः) |
| सम्प्रेक्ष्य | सम्प्रेक्ष्य (√सम्प्र-ईक्ष् + ल्यप्) |
| खस्थ | ख–स्थ (१.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| उ | वा | च | च | म | हा | प्रा | ज्ञः |
| स्व | रे | ण | म | ह | ता | म | हान् |
| सु | ग्री | वं | तां | श्च | सं | प्रे | क्ष्य |
| ख | स्थ | ए | व | वि | भी | ष | णः |