पदच्छेदः
| एषा | एतद् (१.१) |
| त्रिपथगा | त्रिपथगा (१.१) |
| गङ्गा | गङ्गा (१.१) |
| दृश्यते | दृश्यते (√दृश् प्र.पु. एक.) |
| वरवर्णिनि | वरवर्णिनी (८.१) |
| शृङ्गवेरपुरं | शृङ्गवेर–पुर (१.१) |
| चैतद् | च (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| गुहो | गुह (१.१) |
| यत्र | यत्र (अव्ययः) |
| समागतः | समागत (√समा-गम् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | षा | त्रि | प | थ | गा | ग | ङ्गा |
| दृ | श्य | ते | व | र | व | र्णि | नि |
| शृ | ङ्ग | वे | र | पु | रं | चै | त |
| द्गु | हो | य | त्र | स | मा | ग | तः |