अन्वयः
प्रीतः dear, निषादाधिपतिः king of Nishadas गुहः Guha, ते to you, अयोध्यायाः to Ayodhya मार्गम् way, भरतस्य Bharata's, प्रवृत्तिंचnature, निवेदयिष्यति will reveal you
M N Dutt
Guha, the lord of Nişādhas, delighted, shall inform you of the way to Ayodhyā and the well being of Bharata.
Summary
"Dear Guha, the king of Nishadas will tell you the way to Ayodhya and Bharata's nature."
पदच्छेदः
| अयोध्यायाश्च | अयोध्या (६.१)–च (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| मार्गं | मार्ग (२.१) |
| प्रवृत्तिं | प्रवृत्ति (२.१) |
| भरतस्य | भरत (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| निवेदयिष्यति | निवेदयिष्यति (√नि-वेदय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| प्रीतो | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| निषादाधिपतिर् | निषाद–अधिपति (१.१) |
| गुहः | गुह (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | यो | ध्या | या | श्च | ते | मा | र्गं |
| प्र | वृ | त्तिं | भ | र | त | स्य | च |
| नि | वे | द | यि | ष्य | ति | प्री | तो |
| नि | षा | दा | धि | प | ति | र्गु | हः |