अन्वयः
अहम् I, मणिम् jewel, अभिज्ञानम् knowing, लब्द्वा got, चरितार्थः accomplished, आगतः returned, मया me, पुनः again, आगम्य on return, अर्चिष्मान् valuable, सः he, महामणिः that great jewel, अभिज्ञानम् recognising, अक्लिष्टकर्मणः most difficult task, रामस्य to Rama, मया me, दत्तम् gave
M N Dutt
Having returned I presented Råma of unwearied actions with that ensign of a brilliant gem.
Summary
"Knowing that the most difficult task has been accomplished, again I returned and gave the valuable jewel to Rama."
पदच्छेदः
| मया | मद् (३.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| पुनर् | पुनर् (अव्ययः) |
| आगम्य | आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| रामस्याक्लिष्टकर्मणः | राम (६.१)–अक्लिष्ट–कर्मन् (६.१) |
| अभिज्ञानं | अभिज्ञान (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| दत्तम् | दत्त (√दा + क्त, १.१) |
| अर्चिष्मान् | अर्चिष्मत् (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| महामणिः | महत्–मणि (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | या | च | पु | न | रा | ग | म्य |
| रा | म | स्या | क्लि | ष्ट | क | र्म | णः |
| अ | भि | ज्ञा | नं | म | या | द | त्त |
| म | र्चि | ष्मा | न्स | म | हा | म | णिः |