अन्वयः
ततः then, राघवः Raghava, प्रहर्षात् rejoiced, भरतम् Bharata, अङ्कम् thigh, आरोप्य lifted up, ससैन्यः that army, भरताश्रमम् from Bharata's hermitage, ययौ flew
M N Dutt
Thereupon placing Bharata, in delight, on his lap, Raghava, with his army in that car, proceeded towards Bharata's abode.
Summary
Then rejoiced Raghava took Bharata on his lap and flew to Bharata's hermitage with the army.
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रहर्षाद् | प्रहर्ष (५.१) |
| भरतम् | भरत (२.१) |
| अङ्कम् | अङ्क (२.१) |
| आरोप्य | आरोप्य (√आ-रोपय् + ल्यप्) |
| राघवः | राघव (१.१) |
| ययौ | ययौ (√या लिट् प्र.पु. एक.) |
| तेन | तद् (३.१) |
| विमानेन | विमान (३.१) |
| ससैन्यो | स (अव्ययः)–सैन्य (१.१) |
| भरताश्रमम् | भरत–आश्रम (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | तः | प्र | ह | र्षा | द्भ | र | त |
| म | ङ्क | मा | रो | प्य | रा | घ | वः |
| य | यौ | ते | न | वि | मा | ने | न |
| स | सै | न्यो | भ | र | ता | श्र | मम् |