अन्वयः
तदा then, राघवः Raghava, भरताश्रमम् Bharata's hermitage, आसाद्य alighted, ससैन्यः that army, विमानाग्रात् top of Pushpaka, अवतीर्य landed, महीतले on ground, अवतस्थे stood
M N Dutt
That time reaching Bharata's palace Räghava from the top of the aerial car with his army descended upon the earth.
Summary
Raghava alighted from the top of the Pushpaka on reaching the hermitage of Bharata and stood on ground.
पदच्छेदः
| भरताश्रमम् | भरत–आश्रम (२.१) |
| आसाद्य | आसाद्य (√आ-सादय् + ल्यप्) |
| ससैन्यो | स (अव्ययः)–सैन्य (१.१) |
| राघवस्तदा | राघव (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| अवतीर्य | अवतीर्य (√अव-तृ + ल्यप्) |
| विमानाग्राद् | विमान–अग्र (५.१) |
| अवतस्थे | अवतस्थे (√अव-स्था लिट् प्र.पु. एक.) |
| महीतले | मही–तल (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | र | ता | श्र | म | मा | सा | द्य |
| स | सै | न्यो | रा | घ | व | स्त | दा |
| अ | व | ती | र्य | वि | मा | ना | ग्रा |
| द | व | त | स्थे | म | ही | त | ले |