मत्तैर्नागसहस्रैश्च शातकुम्भविभूषितः ।
अपरे हेमकक्ष्याभिः सगजाभिः करेणुभिः ।
निर्ययुस्त्वरया युक्ता रथैश्च सुमहारथाः ॥
मत्तैर्नागसहस्रैश्च शातकुम्भविभूषितः ।
अपरे हेमकक्ष्याभिः सगजाभिः करेणुभिः ।
निर्ययुस्त्वरया युक्ता रथैश्च सुमहारथाः ॥
अन्वयः
मत्स्सैः elephants in rut, सध्वजैः best horses, सुविभूषितैः well decorated, नागसहस्रैः thousand elephants, अपरेतु on the top, हेमकक्षाभिः golden girths on waist, सगजाभिः those elephants, करेणुभिः female elephants also, सुमहारथाः best charioteers, रथैश्च chariots, निर्ययुः proceeded.M N Dutt
Thereupon issued out men on horse back and in cars with thousands of mad elephants welldecked with pennons and she-elephants with golden seats (on their back).Summary
Seated on top of thousands of well decorated elephants in rut, and on the best of horses, people went (to receive Rama). Female elephants had golden girths on their waist. Best charioteers on best chariots proceeded.पदच्छेदः
| मत्तैर् | मत्त (√मद् + क्त, ३.३) |
| नागसहस्रैश्च | नाग–सहस्र (३.३)–च (अव्ययः) |
| शातकुम्भविभूषितैः | शातकुम्भ–विभूषित (√वि-भूषय् + क्त, ३.३) |
| अपरे | अपर (१.३) |
| हेमकक्ष्याभिः | हेमन्–कक्ष्या (३.३) |
| सगजाभिः | स (अव्ययः)–गज (३.३) |
| करेणुभिः | करेणु (३.३) |
| निर्ययुस्त्वरया | निर्ययुः (√निः-या लिट् प्र.पु. बहु.)–त्वरा (३.१) |
| युक्ता | युक्त (√युज् + क्त, १.३) |
| रथैश्च | रथ (३.३)–च (अव्ययः) |
| सुमहारथाः | सु (अव्ययः)–महत्–रथ (१.३) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | त्तै | र्ना | ग | स | ह | स्रै | श्च | शा | त | कु | म्भ |
| वि | भू | षि | तः | अ | प | रे | हे | म | क | क्ष्या | भिः |
| स | ग | जा | भिः | क | रे | णु | भिः | नि | र्य | यु | स्त्व |
| र | या | यु | क्ता | र | थै | श्च | सु | म | हा | र | थाः |