अन्वयः
तदा then, रामस्य Rama's, ऋषिसङ्घैः host of sages, समरुद्गणैः Rudras, देवैश्च gods, आकाशे in the sky, स्तूयमानस्य started praising, मधुरध्वनिः sweet sounding, शुश्रुवे heard.
M N Dutt
There was audible the sweet encomium of Rāma chanted by the crowd of ascetics in the sky, the celestials and the Marutas.
Summary
Then the host of sages, Rudras and gods from the heaven started praising Rama with sweet sounding chanting.
पदच्छेदः
| ऋषिसंघैस्तदाकाशे | ऋषि–संघ (३.३)–तद्–आकाश (७.१) |
| देवैश् | देव (३.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| समरुद्गणैः | स (अव्ययः)–मरुत्–गण (३.३) |
| स्तूयमानस्य | स्तूयमान (√स्तु + शानच्, ६.१) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| शुश्रुवे | शुश्रुवे (√श्रु लिट् प्र.पु. एक.) |
| मधुरध्वनिः | मधुर–ध्वनि (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ऋ | षि | सं | घै | र्त | दा | का | शे |
| दे | वै | श्च | स | म | रु | द्ग | णैः |
| स्तू | य | मा | न | स्य | रा | म | स्य |
| शु | श्रु | वे | म | धु | र | ध्व | निः |