छत्रं तस्य च जग्राह शत्रुघ्नः पाण्डुरं शुभम् ।
श्वेतं च वालव्यजनं सुग्रीवो वानरेश्वरः ।
अपरं चन्द्रसंकाशं राक्षसेन्द्रो विभीषणः ॥
छत्रं तस्य च जग्राह शत्रुघ्नः पाण्डुरं शुभम् ।
श्वेतं च वालव्यजनं सुग्रीवो वानरेश्वरः ।
अपरं चन्द्रसंकाशं राक्षसेन्द्रो विभीषणः ॥
अन्वयः
भरतः Bharata, रमशीन् reins, जग्राह took hold, शत्रुघ्नः Shatrughna, छत्रम् parasol, तस्य his, मूर्ध्नि in front, आददे took, लक्ष्मणः Lakshmana, व्यजनम् fan, सम्पर्यवीजयत् for fanning, परितः held, स्थितः stood, राक्षसेन्द्रः Rakshasa king, विभीषणः Vibheeshana, चन्द्रसङ्काशम् like the moon, श्वेतम् white, अपरम् whisk, वालव्यजनम् for driving the air, जगृहे took holdM N Dutt
Śatrughna held the white and excellent umbrella and Sugrīva the lord of monkeys took the white Chowrie. And Vibhīşaņa the lord of Rákşasas took up another Chowrie resembling the moon.Summary
Bharata held the reins, Shatrughna took hold of the parasol, Lakshmana standing in front held the fan, and the Rakshasa king Vibheeshana held a white whisk which was like a moon for driving the air.पदच्छेदः
| छत्रं | छत्त्र (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| जग्राह | जग्राह (√ग्रह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| शत्रुघ्नः | शत्रुघ्न (१.१) |
| पाण्डुरं | पाण्डुर (२.१) |
| शुभम् | शुभ (२.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| छ | त्रं | त | स्य | च | ज | ग्रा | ह | श | त्रु | घ्नः | पा |
| ण्डु | रं | शु | भम् | श्वे | तं | च | वा | ल | व्य | ज | नं |
| सु | ग्री | वो | वा | न | रे | श्व | रः | अ | प | रं | च |
| न्द्र | सं | का | शं | रा | क्ष | से | न्द्रो | वि | भी | ष | णः |