सर्वात्मना पर्यनुनीयमानो; यदा न सौमित्रिरुपैति योगम् ।
नियुज्यमानो भुवि यौवराज्ये; ततोऽभ्यषिञ्चद्भरतं महात्मा ॥
सर्वात्मना पर्यनुनीयमानो; यदा न सौमित्रिरुपैति योगम् ।
नियुज्यमानो भुवि यौवराज्ये; ततोऽभ्यषिञ्चद्भरतं महात्मा ॥
अन्वयः
यौवराज्ये Prince Regent, नियुज्यमानः compelling, अपि also, सौमित्रिः Saumithri, पर्यनुनीयमानः repeatedly, यदा that, सर्वात्मना high souled, योगम् the position of Regent, नोपैति not accepted, ततः then, महात्मा great soul, भरतम् Bharata, अभ्यषिञ्चत् consecratedM N Dutt
When the son of Sumitrā did not accept the heir apparentship albeit solicited earnestly again and again, the high-souled (Rāma) conferred upon Bharata that dignity.Summary
When Saumithri was compelled repeatedly to accept the position of Prince Regent by the high soul great Rama, he had not accepted. Rama consecrated Bharata as Prince Regent.पदच्छेदः
| सर्वात्मना | सर्व–आत्मन् (३.१) |
| पर्यनुनीयमानो | पर्यनुनीयमान (√पर्यनु-नी + शानच्, १.१) |
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| सौमित्रिर् | सौमित्रि (१.१) |
| उपैति | उपैति (√उप-इ लट् प्र.पु. एक.) |
| योगम् | योग (२.१) |
| नियुज्यमानो | नियुज्यमान (√नि-युज् + शानच्, १.१) |
| भुवि | भू (७.१) |
| यौवराज्ये | यौवराज्य (७.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽभ्यषिञ्चद् | अभ्यषिञ्चत् (√अभि-सिच् लङ् प्र.पु. एक.) |
| भरतं | भरत (२.१) |
| महात्मा | महात्मन् (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्वा | त्म | ना | प | र्य | नु | नी | य | मा | नो |
| य | दा | न | सौ | मि | त्रि | रु | पै | ति | यो | गम् |
| नि | यु | ज्य | मा | नो | भु | वि | यौ | व | रा | ज्ये |
| त | तो | ऽभ्य | षि | ञ्च | द्भ | र | तं | म | हा | त्मा |