अन्वयः
सर्वम् all, मुदितमेव happy, आसीत् remained, सर्वः all, धर्मपरः followed the righteous path, अभवत् became, राममेव Rama alone, अनुपश्यन्तः looking at Rama, परस्परम् one another, नाभ्यहिंसन् not hurt
M N Dutt
All were delighted and devoted to pious observances. And beholding Rāma they did not envy one another.
Summary
All were happy, and followed the righteous path, looking at Rama alone and no one hit another.
पदच्छेदः
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| मुदितम् | मुदित (√मुद् + क्त, १.१) |
| एवासीत् | एव (अव्ययः)–आसीत् (√अस् लङ् प्र.पु. एक.) |
| सर्वो | सर्व (१.१) |
| धर्मपरो | धर्म–पर (१.१) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| रामम् | राम (२.१) |
| एवानुपश्यन्तो | एव (अव्ययः)–अनुपश्यत् (√अनु-पश् + शतृ, १.३) |
| नाभ्यहिंसन् | न (अव्ययः)–अभ्यहिंसन् (√अभि-हिंस् लङ् प्र.पु. बहु.) |
| परस्परम् | परस्पर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | र्वं | मु | दि | त | मे | वा | सी |
| त्स | र्वो | ध | र्म | प | रो | ऽभ | वत् |
| रा | म | मे | वा | नु | प | श्य | न्तो |
| ना | भ्य | हिं | स | न्प | र | स्प | रम् |