पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| रामस्य | राम (६.१) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| निपपात | निपपात (√नि-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| विभीषणः | विभीषण (१.१) |
| पादयोः | पाद (७.२) |
| शरणान्वेषी | शरण–अन्वेषिन् (१.१) |
| चतुर्भिः | चतुर् (३.३) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| राक्षसैः | राक्षस (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तु | रा | म | स्य | ध | र्मा | त्मा |
| नि | प | पा | त | वि | भी | ष | णः |
| पा | द | योः | श | र | णा | न्वे | षी |
| च | तु | र्भिः | स | ह | रा | क्ष | सैः |